॥ ॐ नमः शिवाय ॥ • मैथिली (Maithili)

श्री शिव चालीसा मैथिली में | Shiv Chalisa in Maithili Lyrics, Meaning, Download PDF

भगवान भोलेनाथ महादेव केर असीम कृपा, संकट निवारण आ आत्मिक शांति लेल संपूर्ण श्री शिव चालीसा मैथिली में (Shiv Chalisa in Maithili) पढ़ू। Get Shiv Chalisa in Maithili Lyrics, Meaning, and Download free PDF.

श्री शिव चालीसा ऑडियो | Shiv Chalisa Audio in Maithili

अनुराधा पौडवाल • संपूर्ण चालीसापाठ सुनय लेल प्ले दबाउ
जप चक्र:

श्री शिव चालीसा लिरिक्स | Shiv Chalisa Lyrics in Maithili

फ़ॉन्ट आकार:
॥ दोहा ॥

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥

॥ चौपाई (१ - ४०) ॥

जय गिरिजापति दीन दयाला। सदा करत संतन प्रतिपाला॥

(१)

भाल चंद्रमा सोहत नीके। कानन कुंडल नागफनी के॥

(२)

अंग गौर शिर गंग बहाये। मुंडमाल तन छार लगाये॥

(३)

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देखि नाग मुनि मोहे॥

(४)

मैना मातु की हवै दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥

(५)

कर त्रिशूल सोहत शुचि भाल। करत सदा शत्रुन क्षयकाल॥

(६)

नंदी गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥

(७)

कार्तिक श्याम गण गणनाथा। भयंकर प्रदोष रहत प्रभु साथा॥

(८)

देवन जबहीं जाय पुकारा। तबहीं दुःख प्रभु आप निवारा॥

(९)

किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥

(१०)

तुरत षडानन आप पठायौ। लवनिमेष महँ मार गिरायौ॥

(११)

आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥

(१२)

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचायौ। सबहीं सुरन तब यश गायौ॥

(१३)

भागीरथ हिमवान उपाया। शिव पद पंकज शीश नवाया॥

(१४)

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥

(१५)

वेद माहि महिमा तुम गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥

(१६)

प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला। जरत सुरासुर भये विहाला॥

(१७)

कीन्ह दया तहँ करी सहाई। नीलकंठ तब नाम कहाई॥

(१८)

पूजन रामचंद्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥

(१९)

सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तब त्रिपुरारी॥

(२०)

एक कमल प्रभु राखेउ गोई। कमल नयन पूजन चहँ सोई॥

(२१)

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भये प्रसन्न दिये इच्छित वर॥

(२२)

जय जय जय अनंत अविनाशी। करत कृपा सबके घट वासी॥

(२३)

दुष्ट सकल नित मोहि सतावैं। भ्रमत रहौं मैं चैन न पावैं॥

(२४)

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। यहि अवसर मोहि आन उबारो॥

(२५)

ले त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥

(२६)

मात पिता भ्राता सब कोई। संकट में पूछत नहिं कोई॥

(२७)

स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु मम संकट भारी॥

(२८)

धन निर्धन को देत सदाहीं। जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥

(२९)

स्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥

(३०)

शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारन विघ्न विनाशन॥

(३१)

योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। नारद शारद शीश नवावैं॥

(३२)

नमो नमो जय नमः शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥

(३३)

जो यह पाठ करे मन लाई। तापर होत शंभु सहाई॥

(३४)

ऋणिया जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो होय सुखारी॥

(३५)

पुत्र हीन जो कोई नर होई। सब विधि शंभु कृपा करे सोई॥

(३६)

पंडित त्रयोदशी को लावै। ध्यान पूर्वक होम करावै॥

(३७)

त्रयोदशी व्रत करै हमेशा। तन नहिं ताके रहै कलेशा॥

(३८)

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावै। शंकर संमुख पाठ सुनावै॥

(३९)

जन्म जन्म के पाप नसावै। अंतवास शिवपुर में पावै॥

(४०)
॥ समापन दोहा ॥

नित्त नेम करि प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा। तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥

श्री शिव चालीसा मैथिली PDF डाउनलोड | Shiv Chalisa PDF Download in Maithili

दैनिक पूजा आ पाठ लेल श्री शिव चालीसा केर सुंदर HD PDF (Shiv Chalisa PDF Download in Maithili) मुफ्त में डाउनलोड करू।

Hindi PDF (हिंदी)English PDF

श्री शिव चालीसाक सरल मैथिली भावार्थ | Shiv Chalisa Meaning in Maithili

प्रत्येक चौपाई आ दोहाक पावन तथा सरल मैथिली अनुवाद (Shiv Chalisa Meaning in Maithili)

#पवित्र चौपाई / दोहासरल मैथिली भावार्थ
Doha
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥

माता पार्वतीक पुत्र आ सब मंगलक मूल श्री गणेश जीक जय होबनि! भक्त अयोध्यादास प्रार्थना करैत छथि जे हे प्रभु, हमरा अभय वरदान दिअ।

1
जय गिरिजापति दीन दयाला। सदा करत संतन प्रतिपाला॥

माता पार्वतीक स्वामी आ दीन-दुखिया पर दया करय वला हे महादेव, अहाँ सदा संत आ भक्तक पालन करैत छी।

2
भाल चंद्रमा सोहत नीके। कानन कुंडल नागफनी के॥

माथ पर सुंदर चन्द्रमा शोभित भऽ रहल छथि आ कान में नागक फण सन कुंडल चमकैत अछि।

3
अंग गौर शिर गंग बहाये। मुंडमाल तन छार लगाये॥

गौर वर्णक देह अछि, माथ सं गंगा बहैत छथि, गला में मुंडमाला आ देह पर भस्म लागल अछि।

4
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देखि नाग मुनि मोहे॥

बाघम्बर वस्त्र शोभित भऽ रहल अछि। ई सुंदर रूप देखि नाग आ मुनिगण सेहो मोहित भऽ जाइत छथि।

5
मैना मातु की हवै दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥

माता मैनाक दुलारी पार्वती जी अहाँक वाम अंग में अनुपম রূপে শোভা পাওছথি।

6
कर त्रिशूल सोहत शुचि भाल। करत सदा शत्रुन क्षयकाल॥

हाथ में पवित्र त्रिशूल शोभित अछि, जेकरा सं अहाँ सदा दुष्ट शत्रु सभक संहार करैत छी।

7
नंदी गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥

नंदी आ गणेश जी अहाँक समक्ष एहिना शोभित छथि जेना समुद्रक बीच कमल खिलल हो।

8
कार्तिक श्याम गण गणनाथा। भयंकर प्रदोष रहत प्रभु साथा॥

कार्तिकेय आ शिवगण सदा संगे रहैत छथि; प्रदोष काल में शिव पूजा अति फलदायी होइत अछि।

9
देवन जबहीं जाय पुकारा। तबहीं दुःख प्रभु आप निवारा॥

देवता सभ जखन संकट में गोहारि लगौलनि, तखने अहाँ हुनकर सब दुःख दूर कयलहुँ।

10
किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥

तारकासुर जखन भारी उपद्रव मचौलक, तखन सब देवता मिलि कऽ अहाँक स्तुति कयलनि।

11
तुरत षडानन आप पठायौ। लवनिमेष महँ मार गिरायौ॥

अहाँ तुरंत कार्तिकेय जी केँ पठाओलहुँ, जे पल भरि में तारकासुर केँ मारि गिराओलनि।

12
आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥

अहाँ जलंधर असुरक संहार कयलहुँ। अहाँक ई सुयश संपूर्ण संसार में विख्यात अछि।

13
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचायौ। सबहीं सुरन तब यश गायौ॥

त्रिपुरासुर सं युद्ध कऽ कऽ ओकर नाश कयलहुँ, तखन सब देवता अहाँक यशोगान कयलनि।

14
भागीरथ हिमवान उपाया। शिव पद पंकज शीश नवाया॥

भगीरथक तपस्या सं गंगा केँ जटा में राखि धरती पर उतारलहुँ; भगीरथ चरनक वंदना कयलनि।

15
दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥

संसारक सब दानी में अहाँक समान कोनो दाता नहि छथि, तेँ सेवक सभ सदा अहाँक स्तुति करैत छथि।

16
वेद माहि महिमा तुम गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥

वेद में अहाँक महिमा गाओल गेल अछि। अहाँ अनादि छी, अहाँक पार केओ नहि पाबि सकैत अछि।

17
प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला। जरत सुरासुर भये विहाला॥

समुद्र मंथन में जखन कालकूट विषक ज्वाला निकलल, तखन देव-दानव सब जरय लगलाह आ बेहाल भऽ गेलाह।

18
कीन्ह दया तहँ करी सहाई। नीलकंठ तब नाम कहाई॥

तखन दया कऽ कऽ ओहि विष केँ कंठ में रोकलहुँ, जेकरा सं अहाँक नाम नीलकंठ पड़ल।

19
पूजन रामचंद्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥

श्री रामचंद्र जखन रामेश्वरम में अहाँक पूजन कयलनि, तखन लंका जीति कऽ विभीषण केँ दऽ देलनि।

20
सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तब त्रिपुरारी॥

श्रीराम जखन हजार कमल सं पूजा कऽ रहल छलाह, तखन अहाँ हुनकर भक्तिक परीक्षा लेलहुँ।

21
एक कमल प्रभु राखेउ गोई। कमल नयन पूजन चहँ सोई॥

एक कमल लुका देलहुँ, तखन श्रीराम अपन कमलनयन आँखि चढ़ावय लेल तत्पर भऽ गेलाह।

22
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भये प्रसन्न दिये इच्छित वर॥

एहन कठिन भक्ति देखि भगवान शंकर प्रसन्न भऽ मनवांछित विजयक वरदान देलनि।

23
जय जय जय अनंत अविनाशी। करत कृपा सबके घट वासी॥

हे अनंत, अविनाशी आ सबके हृदय में वास करय वला महादेव! अहाँक सदा जय हो!

24
दुष्ट सकल नित मोहि सतावैं। भ्रमत रहौं मैं चैन न पावैं॥

दुष्ट विचार आ सांसारिक क्लेश हमरा सता रहल अछि, हम भटकैत छी आ शांति नहि भेटैत अछि।

25
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। यहि अवसर मोहि आन उबारो॥

हे नाथ! त्राहि-त्राहि पुकारि अहाँक शरण में छी, एहि अवसर पर आबि हमर उद्धार करू।

26
ले त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥

हाथ में त्रिशूल लऽ शत्रु सभक नाश करू आ संकट सं हमरा रक्षा करू।

27
मात पिता भ्राता सब कोई। संकट में पूछत नहिं कोई॥

माता, पिता, भाई-बंधु केओ संकट काल में सहाय नहि भऽ सकैत अछि।

28
स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु मम संकट भारी॥

हे जगन्नाथ! मात्र अहीं पर भरोसा अछि, आबि कऽ हमर भारी संकट दूर करू।

29
धन निर्धन को देत सदाहीं। जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥

अहाँ निर्धन केँ धन दैत छी; जे जेकर याचना करैत अछि ओ फल पाबैत अछि।

30
स्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥

हम अज्ञानी कोना अहाँक स्तुति करी? हे नाथ, हमर सब भूल क्षमा करू।

31
शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारन विघ्न विनाशन॥

शंकर भगवान संकट नाशक, मंगलक कारण आ विघ्नहर्ता छथि।

32
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। नारद शारद शीश नवावैं॥

बड़का-बड़का योगी मुनि अहाँक ध्यान करैत छथि; नारद आ शारदा माता शीश झुकबैत छथि।

33
नमो नमो जय नमः शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥

ॐ नमः शिवाय मंत्र केँ बारंबार प्रणाम! ब्रह्मादि देवता सेहो अहाँक पार नहि पाबि सकैत छथि।

34
जो यह पाठ करे मन लाई। तापर होत शंभु सहाई॥

जे मन लगा कऽ ई पाठ करैत छथि, हुनका पर शंभु सदा सहाई रहैत छथि।

35
ऋणिया जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो होय सुखारी॥

कर्ज सं पीड़ित व्यक्ति यदि ई पाठ करथि तऽ कर्जमुक्त भऽ सुखी भऽ जाइत छथि।

36
पुत्र हीन जो कोई नर होई। सब विधि शंभु कृपा करे सोई॥

संतानहीन लोक केँ शिव जीक कृपा सं उत्तम संतान भेटैत अछि।

37
पंडित त्रयोदशी को लावै। ध्यान पूर्वक होम करावै॥

त्रयोदशी कऽ विद्वान पंडित केँ बजा कऽ ध्यानपूर्वक शिव होम कराबय।

38
त्रयोदशी व्रत करै हमेशा। तन नहिं ताके रहै कलेशा॥

जे भक्त नियमित प्रदोष व्रत करैत छथि, हुनकर देह में कोनो रोग वा क्लेश नहि रहैत अछि।

39
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावै। शंकर संमुख पाठ सुनावै॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ा कऽ शिव जीक सोझाँ जे ई पाठ सुनावैत छथि...

40
जन्म जन्म के पाप नसावै। अंतवास शिवपुर में पावै॥

हुনক जन्म-जन्मांतरक पाप नष्ट भऽ जाइत अछि आ अंत में शिवलोकक प्राप्ति होइत अछि।

Doha
नित्त नेम करि प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा। तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥

हे जगदीश्वर! हम रोज सबेरे नियम सं ई चालीसा पढ़ैत छी, अहाँ हमर सब मनोकामना पूर्ण करू।

श्री शिव चालीसा वीडियो | Shiv Chalisa Video in Maithili

भगवान शिवक पावन चालीसाक वीडियो भक्तिभाव सं देखू

श्री शिव चालीसा जाप काउंटर | Shiv Chalisa Jap Counter in Maithili

स्क्रीन पर स्पर्श कऽ अपन शिव चालीसा पाठ वा ॐ नमः शिवाय मंत्र जपक गिनती करू

0
संकल्प लक्ष्य:

शिव चालीसा इतिहास आ संत अयोध्यादास | Shiv Chalisa History & Sant Ayodhyadas

सनातन परंपरा अनुसार, श्री शिव चालीसा (Shri Shiv Chalisa) १६म-१७म शताब्दीक महान शिवभक्त संत श्री अयोध्यादास जी (Sant Shri Ayodhyadas) द्वारा रचित अछि। एहि Shiv Chalisa History क स्पष्ट प्रमाण पहिल दोहा में भेटैत अछि: "कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान" आ समापन दोहा में "संवत चौसठ जान, अस्तुति चालीसा शिवहि पूर्ण कीन कल्याण" वर्णित अछि।

शिव पुराण (Shiva Purana) पर आधारित ई पावन Shiv Chalisa in Maithili समुद्र मंथन में विषपान, तारकासुर वध लेल कार्तिकेयक प्राकट्य, भगीरथक गंगा अवतरण आ श्रीरामक रामेश्वरम पूजाक मधुर वर्णन करैत अछि।

शिव चालीसा पाठ केर नियम आ पूजा विधि | Shiv Chalisa Chanting Rules & Vidhi

शास्त्रसम्मत विधि (Shiv Chalisa Vidhi) आ नियमक पालन कऽ पाठ कयला सं संपूर्ण फल भेटैत अछि।

शुभ समय (Auspicious Timings)

भोरक ब्रह्म मुहूर्त (४:०० - ६:००) अथवा सांझक प्रदोष काल शिव साधन लेल सर्वोत्तम अछि।

दिशा आ आसन (Direction & Seat)

उत्तर अथवा पूब दिस मुख कऽ बैसू। कुश वा ऊनी आसनक प्रयोग करू।

पूजा सामग्री (Sacred Offerings)

गाय के घिउक दीप आ धूप बारू। गंगाजल, काँच दूध, बेलपत्र, उज्जर फूल अर्पित करू।

पाठ संख्या आ संकल्प (Chanting Count & Sankalpa)

दैनिक १, ३ अथवा ११ बेर पाठ करू। विशेष मन्नत लेल ४० दिन ११ पाठ करू।

शुद्ध उच्चारण (Pronunciation & Devotion)

शांत मन सं शुद्ध उच्चारण करू। शिव जीक शांत रूपक ध्यान करू।

आरती आ क्षमा प्रार्थना (Aarti & Prayer)

पाठक अंत में शिव आरती वा महामृत्युंजय मंत्र पढ़ू आ क्षमा मांगू।

शिव चालीसा पाठ केर ११ टा अलौकिक लाभ | Shiv Chalisa Benefits & Significance

श्रद्धापूर्वक श्री शिव चालीसाक पाठ (Shiv Chalisa Path) करय वला भक्त सभ केँ प्राप्त होबय वला ११ टा दिव्य लाभ (Shiv Chalisa Benefits in Maithili)

1. मानसिक शांति आ चिंता सं मुक्ति

मानसिक तनाव आ अवसाद दूर भऽ मन शांत रहैत अछि।

2. अकाल मृत्यु सं रक्षा

महाकालक कृपा सं दुर्घटना आ अकाल मृत्यु समाप्त होइत अछि।

3. शनि आ ग्रहदोष निवारण

साढ़ेसाती आ राहु-केतुक कुप्रभाव नष्ट होइत अछि।

4. कर्ज मुक्ति आ आर्थिक संपन्नता

३५म चौपाई अनुसार कर्ज सं मुक्ति आ धन प्राप्ति होइत अछि।

5. पारिवारिक सुख आ संतान लाभ

प्रदोष व्रत संग पाठ सं संतान सुख भेटैत अछि।

6. असाध्य रोग सं मुक्ति

पुरान व्याधि शांत भऽ दीर्घायु प्राप्त होइत अछि।

7. शत्रु नाश आ रक्षा

त्रिशूल गुप्त शत्रु आ नजरदोष सं रक्षा करैत अछि।

8. बुद्धि, ज्ञान आ एकाग्रता

विद्यार्थी सभक स्मरणशक्ति तीव्र होइत अछि।

9. मनोकामना सिद्धि

भगवान आशुतोष भक्तक सब उचित इच्छा पूर्ण करैत छथि।

10. पाप सं मुक्ति

पूर्वजन्मक पाप नष्ट भऽ अंतःकरण शुद्ध होइत अछि।

11. मोक्ष आ शिवलोक प्राप्ति

जीवनक अंत में शिवधामक प्राप्ति होइत अछि।

भगवान शिव केर १४ टा प्रमुख पावन मंदिर आ ज्योतिर्लिंग | Famous Shiva Temples & Jyotirlingas

भारतवर्षक १४ टा सर्वाधिक जागृत शिवतीर्थ (Major Shiva Temples in India)

#मंदिरक नाम (Temple)स्थान (Location)महत्व / स्वरूप
1
सोमनाथ (Somnath)(Somnath Jyotirlinga)
प्रभास पाटन (गुजरात)
प्रथम ज्योतिर्लिंग
2
मल्लिकार्जुन (Mallikarjuna)(Mallikarjuna Jyotirlinga)
श्रीशैलम (आंध्र प्रदेश)
द्वितीय ज्योतिर्लिंग व शक्तिपीठ
3
महाकालेश्वर (Mahakaleshwar)(Mahakaleshwar Jyotirlinga)
उज्जैन (मध्य प्रदेश)
दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग
4
ओंकारेश्वर (Omkareshwar)(Omkareshwar Jyotirlinga)
मांधाता द्वीप (मध्य प्रदेश)
ॐ आकारक ज्योतिर्लिंग
5
केदारनाथ (Kedarnath)(Kedarnath Temple)
रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड)
हिमालयी ज्योतिर्लिंग
6
भीमाशंकर (Bhimashankar)(Bhimashankar Jyotirlinga)
पुणे (महाराष्ट्र)
भीमा नदीक उद्गम
7
काशी विश्वनाथ (Kashi Vishwanath)(Kashi Vishwanath Temple)
वाराणसी (उत्तर प्रदेश)
स्वर्ण मंदिर
8
त्र्यंबकेश्वर (Trimbakeshwar)(Trimbakeshwar Temple)
नासिक (महाराष्ट्र)
त्रिदेव लिंग
9
बैद्यनाथ धाम (Baidyanath Dham)(Baidyanath Jyotirlinga)
देवघर (झारखंड)
मनोकामना लिंग
10
नागेश्वर (Nageshwar)(Nageshwar Jyotirlinga)
द्वारका (गुजरात)
दारुकावन ज्योतिर्लिंग
11
रामेश्वरम (Ramanathaswamy)(Rameshwaram Temple)
रामेश्वरम (तमिलनाडु)
सेतुबंध ज्योतिर्लिंग
12
घृष्णेश्वर (Grishneshwar)(Grishneshwar Temple)
वेरुल (महाराष्ट्र)
१२म अंतिम ज्योतिर्लिंग
13
पशुपतिनाथ (Pashupatinath)(Pashupatinath Temple)
काठमांडू (नेपाल)
अष्टमुखी शिवलिंग (UNESCO)
14
अमरनाथ गुफा (Amarnath Cave)(Amarnath Cave Shrine)
कश्मीर हिमालय
स्वयंभू बर्फानी शिवलिंग

शिव चालीसा प्रश्नोत्तरी | Shiv Chalisa FAQs in Maithili

शिव चालीसा पाठ (Shiv Chalisa Recitation) सं जुड़ल सामान्य प्रश्न